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Vriddhi Sandhi : वृद्धि संधि किसे कहते हैं

Vriddhi Sandhi kise kahate hain: वृद्धि संधि

संस्कृत और हिंदी व्याकरण में संधि का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। जब दो शब्द या वर्ण आपस में मिलते हैं तो उनके मिलने से ध्वनि में जो परिवर्तन होता है उसे संधि कहा जाता है। संधि का अर्थ ही होता है “मिलना” या “संयोग”। हिंदी और संस्कृत व्याकरण में संधि के कई प्रकार होते हैं जैसे – स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि

स्वर संधि के भी कई प्रकार होते हैं जैसे – दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, यण संधि और अयादि संधि। इनमें से वृद्धि संधि एक महत्वपूर्ण संधि है। वृद्धि संधि का प्रयोग संस्कृत और हिंदी दोनों भाषाओं में देखने को मिलता है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि वृद्धि संधि किसे कहते हैं, वृद्धि संधि की परिभाषा, वृद्धि संधि के नियम, वृद्धि संधि का सूत्र तथा वृद्धि संधि के उदाहरण क्या होते हैं।

वृद्धि संधि की परिभाषा

जब अ या आ के बाद ए, ऐ, ओ, औ में से कोई स्वर आता है और उनके मिलने से ऐ या औ बन जाता है, तब उसे वृद्धि संधि कहा जाता है।

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जब दो स्वरों के मेल से ऐ या औ की उत्पत्ति होती है, तो वह संधि वृद्धि संधि कहलाती है।

वृद्धि का अर्थ होता है बढ़ना। जब संधि के कारण स्वर की ध्वनि और शक्ति बढ़ जाती है, तो उसे वृद्धि संधि कहा जाता है।

वृद्धि संधि का सूत्र

संस्कृत व्याकरण में वृद्धि संधि का सूत्र इस प्रकार बताया गया है –

  • अ / आ + ए / ऐ = ऐ
  • अ / आ + ओ / औ = औ

अर्थात जब अ या आ के बाद ए या ऐ आता है तो बनता है और जब अ या आ के बाद ओ या औ आता है तो बनता है।

वृद्धि संधि के नियम

आपका अगला टॉपिक पढ़े यण संधि (इअ=य)

वृद्धि संधि को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों को जानना आवश्यक है।

1. अ या आ के बाद ए या ऐ आने पर “ऐ” बनता है

जब किसी शब्द का अंत अ या आ से होता है और दूसरे शब्द की शुरुआत ए या ऐ से होती है, तो दोनों के मिलने पर बन जाता है।

  • तथा + एव = तथैव
  • सदा + एव = सदैव
  • प्र + एष = प्रैष

2. अ या आ के बाद ओ या औ आने पर “औ” बनता है

जब किसी शब्द के अंत में अ या आ हो और दूसरे शब्द की शुरुआत ओ या औ से हो, तो उनके मिलने से बन जाता है।

  • वन + औषधि = वनौषधि
  • महा + औषधि = महौषधि
  • प्र + ओज = प्रौज

वृद्धि संधि के उदाहरण : vriddhi sandhi ke udaharan

आपका अगला टॉपिक पढ़े अयादि संधि (एअ=य)

नीचे 25 उदाहरण दिए गए हैं और हर उदाहरण को आसानी से समझाने की कोशिश की गई है।

वृद्धि संधि के 25 उदाहरण

  • 1. तथा + एव = तथैव
    यहाँ “तथा” का अंत “आ” से हो रहा है और “एव” की शुरुआत “ए” से हो रही है। आ और ए के मिलने से “ऐ” बन गया, इसलिए यहाँ वृद्धि संधि हुई।
  • 2. सदा + एव = सदैव
    यहाँ “सदा” के अंत में “आ” है और “एव” की शुरुआत “ए” से है। दोनों स्वरों के मिलने से “ऐ” बन गया, इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 3. प्र + एष = प्रैष
    यहाँ “प्र” के अंत में “अ” है और “एष” की शुरुआत “ए” से है। अ और ए के मिलने से “ऐ” बन गया, इसलिए यह वृद्धि संधि है।
  • 4. प्र + एषणा = प्रैषणा
    यहाँ “अ” और “ए” के मेल से “ऐ” बना है। इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 5. महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
    यहाँ “आ” और “ऐ” के मिलने से “ऐ” बना है। इस प्रकार यहाँ वृद्धि संधि हुई है।
  • 6. लोक + ऐक्य = लोकैक्य
    “लोक” का अंत “अ” से है और “ऐक्य” की शुरुआत “ऐ” से। दोनों के मिलने से “ऐ” बना, इसलिए यह वृद्धि संधि है।
  • 7. महा + ऐश्वर्यवान = महैश्वर्यवान
    यहाँ “आ” और “ऐ” मिलकर “ऐ” बनाते हैं। इस कारण यहाँ वृद्धि संधि होती है।
  • 8. सदा + एतत् = सदैतत्
    यहाँ “आ” और “ए” के मिलने से “ऐ” बना है। इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 9. वन + औषधि = वनौषधि
    यहाँ “अ” और “औ” के मिलने से “औ” बन गया। इस कारण यहाँ वृद्धि संधि हुई है।
  • 10. महा + औषधि = महौषधि
    यहाँ “आ” और “औ” के मिलने से “औ” बन गया। इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 11. प्र + ओज = प्रौज
    यहाँ “अ” और “ओ” के मिलने से “औ” बन गया। इस कारण यह वृद्धि संधि है।
  • 12. प्र + ओषधि = प्रौषधि
    “अ” और “ओ” के मिलने से “औ” बन गया। इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 13. महा + ओजस्वी = महौजस्वी
    यहाँ “आ” और “ओ” मिलकर “औ” बनाते हैं। इस कारण यहाँ वृद्धि संधि होती है।
  • 14. जन + औदार्य = जनौदार्य
    यहाँ “अ” और “औ” के मिलने से “औ” बन गया। इसलिए यह वृद्धि संधि है।
  • 15. पर + ऐश्वर्य = पैरश्वर्य
    यहाँ “अ” और “ऐ” मिलकर “ऐ” बनाते हैं। इस कारण यहाँ वृद्धि संधि होती है।
  • 16. सदा + एषः = सदैषः
    “आ” और “ए” के मिलने से “ऐ” बन गया। इसलिए यह वृद्धि संधि है।
  • 17. प्र + ऐश्वर्य = प्रैश्वर्य
    यहाँ “अ” और “ऐ” के मिलने से “ऐ” बन गया। इस कारण यहाँ वृद्धि संधि हुई।
  • 18. प्र + ओढ = प्रौढ
    यहाँ “अ” और “ओ” के मिलने से “औ” बन गया। इसलिए यह वृद्धि संधि है।
  • 19. महा + ओज = महौज
    “आ” और “ओ” के मिलने से “औ” बन गया। इस कारण यहाँ वृद्धि संधि हुई।
  • 20. जन + औचित्य = जनौचित्य
    यहाँ “अ” और “औ” के मिलने से “औ” बन गया। इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 21. प्र + एति = प्रैति
    “अ” और “ए” के मिलने से “ऐ” बन गया। इस कारण यह वृद्धि संधि है।
  • 22. सदा + एषणा = सदैषणा
    यहाँ “आ” और “ए” के मिलने से “ऐ” बना है। इसलिए यह वृद्धि संधि का उदाहरण है।
  • 23. प्र + एन्द्र = प्रैन्द्र
    यहाँ “अ” और “ए” के मिलने से “ऐ” बन गया। इसलिए यहाँ वृद्धि संधि होती है।
  • 24. महा + औदार्य = महौदार्य
    यहाँ “आ” और “औ” के मिलने से “औ” बन गया। इस कारण यह वृद्धि संधि है।
  • 25. लोक + औचित्य = लोकौचित्य
    यहाँ “अ” और “औ” के मिलने से “औ” बन गया। इस प्रकार यह वृद्धि संधि का स्पष्ट उदाहरण है।

इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जब अ या आ के बाद ए, ऐ, ओ, औ आते हैं और उनके मेल से ऐ या औ बनते हैं, तो वहाँ वृद्धि संधि होती है।


Vriddhi Sandhi in Sanskrit

संस्कृत भाषा में वृद्धि संधि का प्रयोग बहुत अधिक किया जाता है। संस्कृत व्याकरण के अनुसार जब दो शब्दों के मिलने से स्वर की ध्वनि में वृद्धि अर्थात बढ़ोतरी होती है, तब उसे वृद्धि संधि कहा जाता है।

संस्कृत में वृद्धि स्वर ऐ और औ माने जाते हैं। जब संधि के परिणामस्वरूप ये स्वर बनते हैं, तो उसे वृद्धि संधि कहा जाता है।

उदाहरण के लिए –

  • तथा + एव = तथैव
  • सदा + एव = सदैव
  • महा + औषधि = महौषधि

इन उदाहरणों में स्पष्ट दिखाई देता है कि दो स्वरों के मिलने से “ऐ” और “औ” बने हैं, इसलिए यहाँ वृद्धि संधि हुई है।

FAQ (Frequently Asked Questions)

जब अ या आ के बाद ए, ऐ, ओ या औ स्वर आते हैं और उनके मेल से ऐ या औ बन जाता है, तब उस संधि को वृद्धि संधि कहा जाता है। सरल शब्दों में, जब दो स्वरों के मिलने से ध्वनि में वृद्धि होकर “ऐ” या “औ” का निर्माण होता है, तब वहाँ वृद्धि संधि होती है।
जब अ या आ के बाद ए या ऐ आने पर बनता है तथा अ या आ के बाद ओ या औ आने पर बनता है, तो इस प्रकार होने वाली स्वर संधि को वृद्धि संधि कहा जाता है।
वृद्धि संधि के कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं –
  • तथा + एव = तथैव
  • सदा + एव = सदैव
  • महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
  • वन + औषधि = वनौषधि
  • महा + औषधि = महौषधि
इन उदाहरणों में दो स्वरों के मिलने से “ऐ” और “औ” बने हैं, इसलिए यहाँ वृद्धि संधि हुई है।
वृद्धि संधि के मुख्य नियम इस प्रकार हैं –
  • अ / आ + ए / ऐ = ऐ (जैसे – सदा + एव = सदैव)
  • अ / आ + ओ / औ = औ (जैसे – महा + औषधि = महौषधि)
इन नियमों के अनुसार जब इन स्वरों का मेल होता है, तो वृद्धि संधि बनती है।
संस्कृत व्याकरण में वृद्धि संधि का सूत्र इस प्रकार बताया गया है –
  • अ / आ + ए / ऐ = ऐ
  • अ / आ + ओ / औ = औ
इस सूत्र के अनुसार दो स्वरों के मिलने से “ऐ” और “औ” की उत्पत्ति होती है, जिसे वृद्धि संधि कहा जाता है।
संस्कृत व्याकरण में वृद्धि संधि स्वर संधि का एक महत्वपूर्ण प्रकार है। संस्कृत में ऐ और औ को वृद्धि स्वर कहा जाता है। जब दो शब्दों के मिलने से इन स्वरों की उत्पत्ति होती है, तो उसे वृद्धि संधि कहा जाता है।